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तपती गर्मी में क्यों बढ़ जाती है चिड़चिड़ाहट? जानें दिमाग पर पड़ने वाला असर

जैसे-जैसे तापमान ऊपर चढ़ता है, वैसे-वैसे लोगों का मूड भी प्रभावित होने लगता है। अक्सर देखा जाता है कि तेज धूप, भीड़भाड़ या ट्रैफिक जैसी छोटी-छोटी स्थितियों में भी इंसान जल्दी चिड़चिड़ा हो जाता है। यह सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा गर्मी केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करती है। जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इस दौरान दिल की धड़कन तेज होती है और पसीना अधिक आता है, जिससे थकान बढ़ती है और दिमाग पर दबाव पड़ता है। यही वजह है कि व्यक्ति जल्दी गुस्सा महसूस करता है।

नींद पर भी गर्मी का गहरा असर पड़ता है। गर्म और उमस भरी रातों में अच्छी नींद नहीं आ पाती, जिससे दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी झुंझला उठता है।

इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी भी मूड खराब होने का एक बड़ा कारण है। पसीने के साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसका असर सिरदर्द, थकावट और ध्यान में कमी के रूप में दिखता है, जो गुस्से को और बढ़ाता है।

गर्मी का प्रभाव अलग-अलग उम्र के लोगों पर अलग तरीके से नजर आता है। बच्चे जल्दी चिड़चिड़े हो जाते हैं, जबकि बुजुर्गों में कमजोरी और मानसिक थकान ज्यादा महसूस होती है।

कैसे रखें खुद को शांत?
गर्मी के दौरान कुछ आसान उपाय अपनाकर गुस्से और चिड़चिड़ापन कम किया जा सकता है:

  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें
  • नारियल पानी, नींबू पानी जैसे प्राकृतिक पेय शामिल करें
  • हल्का और सुपाच्य भोजन करें, ज्यादा मसालेदार खाने से बचें
  • चाय-कॉफी का सेवन सीमित रखें
  • दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें

अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो गर्मी के मौसम में भी मन को शांत और संतुलित रखा जा सकता है।

(Photo : AI Generated)