तकनीक के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल बड़े रिसर्च सेंटरों तक सीमित नहीं रह गया है। मोबाइल और इंटरनेट की मदद से यह हर घर और हर छात्र तक पहुंच चुका है। बच्चे आज पढ़ाई, प्रोजेक्ट और होमवर्क के लिए तेजी से AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसका इस्तेमाल समझदारी से नहीं किया गया, तो यह बच्चों की सीखने और सोचने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ जानकारी हासिल करना नहीं होता, बल्कि बच्चों में तर्क करने, समस्या समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी होता है। जब छात्र हर सवाल का जवाब सीधे AI से लेने लगते हैं, तो वे खुद सोचने और मेहनत करने की प्रक्रिया से दूर होने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत “शॉर्टकट कल्चर” में बदल सकती है, जिससे मानसिक विकास प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
शिक्षकों का कहना है कि होमवर्क करते समय AI तुरंत जवाब दे सकता है, लेकिन परीक्षा के दौरान विद्यार्थी को अपनी समझ, अभ्यास और याददाश्त के भरोसे ही प्रदर्शन करना होता है। ऐसे में अगर बच्चा हर छोटी-बड़ी चीज के लिए AI पर निर्भर हो जाए, तो कठिन परिस्थितियों में उसका आत्मविश्वास कमजोर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI सामान्य सवालों का उत्तर आसानी से दे देता है क्योंकि इंटरनेट पर उससे जुड़ी जानकारी पहले से उपलब्ध होती है। लेकिन जब जटिल और तार्किक सोच वाले सवाल सामने आते हैं, जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं के कठिन प्रश्न, तब कई बार AI गलत या अधूरे जवाब भी दे सकता है। इसकी वजह यह है कि AI डेटा के आधार पर काम करता है, उसके पास इंसानों जैसी वास्तविक समझ और विश्लेषण क्षमता नहीं होती।
हालांकि जानकार यह भी मानते हैं कि आज के समय में बच्चों को AI से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं है। इसलिए जरूरी है कि उन्हें इसका सही उपयोग सिखाया जाए। बच्चों को यह समझाना होगा कि AI केवल एक सहायक उपकरण है, न कि सोचने की क्षमता का विकल्प। इसके लिए स्कूलों में “प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” जैसे छोटे कोर्स शुरू करने की सलाह दी जा रही है, ताकि छात्र AI से सही तरीके से सवाल पूछना और मिली जानकारी को परखना सीख सकें।
शिक्षकों और अभिभावकों को भी बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है। अगर छात्र होमवर्क में AI की मदद लेते हैं, तो उन्हें इसकी जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही बच्चों को यह आदत डालनी चाहिए कि वे AI से मिली जानकारी को दूसरी विश्वसनीय जगहों से भी जांचें और अपनी समझ का इस्तेमाल करके सही-गलत का फैसला करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दौर में AI उपयोगी जरूर है, लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए यह जरूरी है कि तकनीक का इस्तेमाल संतुलित तरीके से किया जाए, ताकि उनकी रचनात्मकता, तार्किक क्षमता और आत्मविश्वास प्रभावित न हो।
(Photo : AI Generated)