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कश्मीर का जिक्र कर EU-पाकिस्तान बयान ने बढ़ाई हलचल, भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

यूरोपीय यूनियन (EU) और पाकिस्तान के बीच हुई रणनीतिक वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान ने कश्मीर मुद्दे को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। इस बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख होने पर कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं और इसे भारत के दृष्टिकोण से संवेदनशील बताया है। दरअसल, यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास हाल ही में पाकिस्तान दौरे पर थीं। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र शामिल था।

संयुक्त बयान में क्या कहा गया?

EU और पाकिस्तान के साझा बयान में बताया गया कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े अपने विचार और जानकारी EU के सामने रखी, जबकि यूरोपीय पक्ष ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में जानकारी साझा की। बयान में दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया।

विशेषज्ञों को क्यों दिख रही आपत्ति?

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख होना भारत के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। उनका तर्क है कि इससे यह संदेश जा सकता है कि कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय है, जबकि भारत लगातार इसे अपना आंतरिक मामला और अभिन्न हिस्सा बताता रहा है। कुछ जानकारों ने यह भी कहा कि बयान में जम्मू-कश्मीर और यूक्रेन संघर्ष का एक साथ उल्लेख किए जाने से दोनों मुद्दों के बीच समानता का संकेत मिल सकता है, जो भारत के आधिकारिक रुख से मेल नहीं खाता।

भारत का क्या है रुख?

भारत बार-बार स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न अंग हैं। नई दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र (PoK) भी भारत का हिस्सा है। ऐसे में किसी तीसरे पक्ष द्वारा कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीय मंचों या संयुक्त बयानों में उल्लेख भारत के लिए संवेदनशील माना जाता है।

पाकिस्तान को ‘क्षेत्रीय शक्ति’ बताया

अपने दौरे के दौरान काजा कल्लास ने पाकिस्तान को क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान EU का एक अहम साझेदार है और दोनों पक्ष आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। कल्लास ने पाकिस्तान की उस भूमिका की भी सराहना की, जिसमें उसने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया था। इसके अलावा उन्होंने रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय का दौरा कर सेना प्रमुख असीम मुनीर से भी मुलाकात की।

क्यों चर्चा में है यह बयान?

EU और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में कश्मीर का उल्लेख, पाकिस्तान को क्षेत्रीय शक्ति बताने वाली टिप्पणी और यूक्रेन संघर्ष के साथ समानांतर संदर्भ ने इस पूरे घटनाक्रम को सुर्खियों में ला दिया है। यही वजह है कि इस बयान को भारत की कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।