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PoK में बढ़ता संकट: प्रदर्शनकारियों पर दबाव के आरोप, जरूरी सामान की कमी से लोगों की बढ़ी परेशानी

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शन अब गंभीर संकट में बदलता नजर आ रहा है। अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे लोगों और सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें शांत कराने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है, जिससे आम जनता को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कई प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने वाले वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जा रही है। हालांकि पाकिस्तानी प्रशासन किसी भी तरह की नाकेबंदी से इनकार कर रहा है, लेकिन जमीन पर हालात अलग होने की बात कही जा रही है।

राशन, ईंधन और दवाओं की कमी

PoK में चल रहे बंद और विरोध के कारण बाजारों पर असर पड़ा है। कई जगह दुकानें बंद हैं और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान मिलना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि कई इलाकों में आटा, खाने-पीने की चीजें, पेट्रोल और जरूरी दवाओं की कमी महसूस की जा रही है।

पुंछ और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में पेट्रोल पंपों पर भी असर देखने को मिल रहा है। कई वाहन चालकों को महंगे दामों पर ईंधन खरीदना पड़ रहा है। इसके अलावा इंटरनेट सेवाओं की परेशानी ने लोगों की दिक्कतें और बढ़ा दी हैं।

लोगों ने बताई परेशानी

नीलम जिले के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि हड़ताल शुरू होने के बाद राशन की उपलब्धता काफी प्रभावित हुई है। लोगों को डिपो में पैसे जमा करने के बाद भी कई दिनों तक आटा नहीं मिल पा रहा है। खुले बाजार में सामान मौजूद है तो उसकी कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं।

अब्बासपुर और रावलकोट के लोगों ने भी बताया कि बंद और सप्लाई में रुकावट के चलते आम जिंदगी प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाजार बंद होने और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से हालात ज्यादा खराब हुए हैं।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी पीटीआई ने आरोप लगाया है कि प्रशासन प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में जरूरी सामान पहुंचने में बाधा डाल रहा है। पार्टी का दावा है कि कई रास्तों पर लोगों की आवाजाही रोकी जा रही है और उन्हें खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की परेशानी झेलनी पड़ रही है।

वहीं सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में लगी है।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

PoK में तनाव की शुरुआत विधानसभा की उन सीटों को लेकर विवाद से हुई, जो कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल इस्लामाबाद राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए करता है।

इसी मुद्दे को लेकर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में आंदोलन शुरू हुआ, जिसने अब बड़े विरोध का रूप ले लिया है।

आगे बढ़ सकता है आंदोलन

सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन जारी हैं। रावलकोट समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। मुजफ्फराबाद में भी प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

लगातार बढ़ते तनाव के बीच PoK में आम लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं और सरकार के खिलाफ नाराजगी भी गहराती नजर आ रही है।