मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को बड़ा झटका लगा है। गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए मुंबई पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस की ओर से इस संबंध में CJP के पदाधिकारी को पत्र भेजकर कारण भी बताए गए हैं। इसके बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर उन्हें प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई तो गांधी जयंती के दिन मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया जाएगा।
CJP ने पहले 2 अक्टूबर को मुंबई से अपने आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। संगठन की ओर से यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे को लेकर प्रस्तावित किया गया था। अब शिवाजी पार्क में अनुमति नहीं मिलने के बाद आंदोलन की अगली रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई है। पुलिस ने संगठन को मुंबई में किसी दूसरे स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संबंधित पुलिस थाने या पुलिस मुख्यालय में आवेदन करने की सलाह दी है।
शिवाजी पार्क में क्यों नहीं मिली अनुमति?
मुंबई पुलिस के अनुसार, शिवाजी पार्क में किसी सभा या प्रदर्शन की अनुमति देने को लेकर उसके अधिकार सीमित हैं। पुलिस ने अपने जवाब में बॉम्बे हाई कोर्ट के PIL 116/2009 में 4 जनवरी 2013 को दिए गए आदेश का हवाला दिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार के 20 जनवरी 2016 के आदेश का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस का कहना है कि इन आदेशों और नियमों के तहत शिवाजी पार्क में किसी भी तरह के जमावड़े की अनुमति देने का अधिकार मुंबई पुलिस के पास नहीं है। इसी आधार पर CJP के प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी गई। मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी यही स्पष्टीकरण साझा किया कि शिवाजी पार्क में किसी सभा की अनुमति देने के लिए वह अधिकृत नहीं है।
CJP ने 2 अक्टूबर को शाम 3 बजे से 5 बजे तक शिवाजी पार्क, दादर में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। प्रस्तावित कार्यक्रम का समय और स्थान पुलिस के सामने पहले से रखा गया था। हालांकि पुलिस की ओर से स्थान को लेकर लागू नियमों का हवाला देते हुए आवेदन को मंजूरी नहीं दी गई।
पुलिस ने दूसरे स्थान पर प्रदर्शन का दिया विकल्प
मुंबई पुलिस ने CJP को केवल अनुमति से इनकार करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संगठन को वैकल्पिक जगह तलाशने की सलाह भी दी है। पुलिस के मुताबिक, यदि CJP मुंबई में किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन करना चाहता है तो संबंधित पुलिस थाने या पुलिस मुख्यालय में अनुमति के लिए आवेदन किया जा सकता है।
इससे यह साफ है कि मौजूदा विवाद मुख्य रूप से शिवाजी पार्क में प्रस्तावित सभा को लेकर है। वैकल्पिक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए CJP को नए सिरे से अनुमति प्रक्रिया का सामना करना होगा। इस स्थिति में संगठन के सामने अब यह तय करने की चुनौती है कि वह 2 अक्टूबर को किस स्थान पर और किस तरीके से अपना कार्यक्रम आगे बढ़ाता है।
पुलिस ने किन वजहों का किया उल्लेख?
शिवाजी पार्क को लेकर पुलिस की ओर से सिर्फ हाई कोर्ट के आदेश का ही हवाला नहीं दिया गया है। क्षेत्र की संवेदनशीलता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, शिवाजी पार्क के आसपास अस्पताल और अन्य महत्वपूर्ण स्थान हैं। किसी बड़े प्रदर्शन की स्थिति में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।
इसके अलावा इलाके में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम भी लागू होते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने और कार्यक्रम के दौरान लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल से संबंधित नियमों का सवाल भी उठता है। पुलिस ने इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिवाजी पार्क में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है।
CJP ने पहले क्या ऐलान किया था?
CJP की ओर से 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध अभियान शुरू करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा था कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो गांधी जयंती के अवसर पर मुंबई से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
CJP ने इस आंदोलन को आगे देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाने की बात कही थी। संगठन की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। इनमें स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करने जैसी मांगें भी शामिल बताई गई हैं।
इसके अलावा CJP की ओर से चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग भी उठाई गई है। संगठन का कहना है कि चुनाव व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर वह अपना विरोध जारी रखेगा। ये CJP की घोषित मांगें हैं; इन मांगों और उनसे जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों की अलग-अलग राय हो सकती है।
अनुमति नहीं मिली तो ‘जेल भरो’ की चेतावनी
मुंबई पुलिस के फैसले के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके संगठन को 2 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई है। दीपके ने इसे नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश बताया और कहा कि अगर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाती है तो गांधी जयंती पर मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया जाएगा।
CJP ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी कहा कि उसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई। संगठन ने अपने अगले कदम के तौर पर जेल भरो आंदोलन की बात कही है। हालांकि, इस आंदोलन का वास्तविक स्वरूप, इसमें कितने लोग शामिल होंगे और पुलिस-प्रशासन की ओर से इसे लेकर क्या व्यवस्था होगी, यह 2 अक्टूबर के करीब स्पष्ट होगा।
क्या आजाद मैदान बन सकता है अगला ठिकाना?
शिवाजी पार्क में अनुमति नहीं मिलने के बाद अब CJP के लिए वैकल्पिक स्थान अहम हो गया है। सामने आई रिपोर्टों में आजाद मैदान का नाम भी संभावित विकल्प के तौर पर सामने आया है। हालांकि वहां प्रदर्शन के लिए अलग से संबंधित पुलिस अथॉरिटी से अनुमति लेना जरूरी होगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 2 अक्टूबर के कार्यक्रम के लिए CJP को वैकल्पिक स्थान पर अनुमति मिलती है या नहीं।
अगर संगठन आजाद मैदान या मुंबई के किसी अन्य निर्धारित स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है तो उसे वहां लागू नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना होगा। मुंबई पुलिस ने भी अपने जवाब में वैकल्पिक स्थान पर आवेदन करने का रास्ता सुझाया है।
गांधी जयंती पर आमने-सामने होंगे दो रुख
2 अक्टूबर को होने वाला यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गांधी जयंती के दिन प्रस्तावित है। CJP ने जहां इस तारीख को अपने आंदोलन के लिए चुना है, वहीं पुलिस ने शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति से संबंधित न्यायिक आदेशों और प्रशासनिक नियमों का हवाला दिया है।
एक तरफ CJP अपने घोषित कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की बात कर रही है, दूसरी तरफ पुलिस का रुख है कि शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति देने के संबंध में उसके पास अधिकार नहीं है। अब दोनों पक्षों के रुख के बीच अगला कदम वैकल्पिक स्थान और अनुमति प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
अब CJP के सामने क्या विकल्प?
मुंबई पुलिस के फैसले के बाद CJP के सामने फिलहाल कई संभावित रास्ते हैं। पहला, संगठन किसी दूसरे स्थान के लिए अनुमति मांग सकता है। दूसरा, वह अपने प्रस्तावित कार्यक्रम का स्वरूप या स्थान बदल सकता है। तीसरा, यदि संगठन अपने नेताओं के मौजूदा बयान के मुताबिक आगे बढ़ता है तो 2 अक्टूबर को जेल भरो आंदोलन का ऐलान लागू करने की कोशिश कर सकता है।
हालांकि, इन विकल्पों में से संगठन किसे अपनाएगा, इस पर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है। फिलहाल इतना तय है कि शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को शाम 3 से 5 बजे तक प्रस्तावित प्रदर्शन को मुंबई पुलिस ने अनुमति नहीं दी है और CJP ने इसके जवाब में आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।
इस पूरे मामले का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर CJP का विरोध है। संगठन उनकी भूमिका और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों पर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, मुंबई पुलिस ने अपने स्तर पर शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश और राज्य सरकार के निर्देशों को आधार बनाया है।
अब निगाहें 2 अक्टूबर पर रहेंगी कि CJP अपने घोषित कार्यक्रम को किस रूप में आगे बढ़ाती है, क्या उसे मुंबई में किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति मिलती है और ‘जेल भरो आंदोलन’ को लेकर संगठन की घोषणा वास्तव में किस रूप में सामने आती है।