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कश्मीर पर अमेरिकी नीति में बदलाव नहीं, सर्जियो गोर के बयान के बाद पाकिस्तान को वॉशिंगटन का स्पष्टीकरण

जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की अगस्त में की गई टिप्पणी से पैदा हुआ कूटनीतिक विवाद अब एक नए स्पष्टीकरण के साथ सामने आया है। पाकिस्तान के अनुसार, गोर के श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर को भारत का “महत्वपूर्ण हिस्सा” बताए जाने के बाद इस्लामाबाद ने वॉशिंगटन से यह जानने की कोशिश की कि क्या अमेरिका ने कश्मीर को लेकर अपनी पुरानी नीति में कोई बदलाव किया है। अब पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को बताया है कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वॉशिंगटन अभी भी जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का विषय मानता है और उसका मानना है कि इस मुद्दे का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए होना चाहिए। यह जानकारी पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में राजनयिक सूत्रों के हवाले से दी है।

गोर की टिप्पणी के बाद क्यों उठे सवाल?

पूरा विवाद 19 अगस्त 2026 को शुरू हुआ, जब भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर पहुंचे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए गोर ने जम्मू-कश्मीर को “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया। यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि अमेरिका लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात करता रहा है। गोर की टिप्पणी के बाद पाकिस्तान में यह सवाल उठने लगा कि क्या अमेरिकी प्रशासन की भाषा और कश्मीर को लेकर उसका कूटनीतिक दृष्टिकोण बदल रहा है।

पाकिस्तान के लिए गोर का बयान इसलिए भी संवेदनशील था क्योंकि इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर को एक अंतरराष्ट्रीय विवादित क्षेत्र के रूप में पेश करता रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने गोर की टिप्पणी के तुरंत बाद इसका विरोध किया था और कहा था कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी उसके अनुसार अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति से अलग थी। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख को तलब करके औपचारिक विरोध भी दर्ज कराया था।

इस्लामाबाद ने वॉशिंगटन से मांगा था जवाब

गोर के बयान के बाद पाकिस्तान ने सीधे यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि क्या अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी को अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए। पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, इसी सवाल पर इस्लामाबाद ने वॉशिंगटन से स्पष्टीकरण मांगा। अब अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों को कथित तौर पर बताया है कि गोर के बयान का अर्थ कश्मीर पर अमेरिकी नीति में बदलाव नहीं है। अमेरिकी पक्ष ने कहा कि कश्मीर को लेकर उसकी स्थिति पहले जैसी ही है और वॉशिंगटन इस विषय को भारत और पाकिस्तान के बीच सुलझाए जाने वाला विवाद मानता है।

‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि “हमारी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।” अमेरिकी पक्ष के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के सवाल पर उसकी नीति को गोर की श्रीनगर में की गई टिप्पणी के आधार पर अलग तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। इस स्पष्टीकरण से पाकिस्तान को यह संदेश मिला कि अमेरिकी प्रशासन आधिकारिक नीति के स्तर पर अपनी पुरानी स्थिति से पीछे नहीं हटा है।

अमेरिका की नीति और राजदूत की टिप्पणी के बीच अंतर

इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी राजदूत की सार्वजनिक टिप्पणी और किसी देश की औपचारिक विदेश नीति को हमेशा एक ही चीज नहीं माना जाता। गोर ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था, लेकिन अब सामने आए अमेरिकी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि इससे कश्मीर विवाद पर वॉशिंगटन की आधिकारिक नीति में बदलाव नहीं हुआ है। यही अंतर इस विवाद के केंद्र में है। एक तरफ गोर का बयान था, जिसने पाकिस्तान में यह आशंका पैदा की कि अमेरिका भारत के रुख के करीब जा रहा है; दूसरी तरफ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दिया गया कथित स्पष्टीकरण है, जिसमें नीति बदलने से इनकार किया गया है।

गोर का बयान भारत में भी चर्चा का विषय बना था। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने उस टिप्पणी को अमेरिकी नीति में बदलाव के रूप में औपचारिक रूप से पेश नहीं किया। भारत का आधिकारिक रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। अगस्त में गोर की टिप्पणी के बाद भी नई दिल्ली की ओर से प्रतिक्रिया को लेकर सावधानी बरती गई और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत के पहले से चले आ रहे रुख को दोहराया।

श्रीनगर में गोर ने क्या कहा था?

सर्जियो गोर का श्रीनगर दौरा कई वजहों से चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में सुधार का भी उल्लेख किया। गोर ने संकेत दिया था कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए जारी अपनी यात्रा चेतावनी की समीक्षा कर सकता है। उनका कहना था कि अमेरिका समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए जारी यात्रा सलाह की समीक्षा करता है और जम्मू-कश्मीर की स्थिति को देखते हुए मौजूदा चेतावनी पर भी विचार किया जा सकता है।

गोर की यात्रा ऐसे समय में हुई थी जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, पर्यटन और क्षेत्र में सामान्य स्थिति को लेकर चर्चा जारी थी। उनके मुताबिक, स्थानीय सरकार और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसी संदर्भ में अमेरिकी यात्रा सलाह में संभावित बदलाव की बात सामने आई थी। हालांकि, उन्होंने तत्काल किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की थी।

पाकिस्तान ने तुरंत जताई थी आपत्ति

गोर के बयान के कुछ ही घंटों के भीतर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान ने इस टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति उसके अनुसार एक अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय है और इसके अंतिम समाधान का सवाल अभी बाकी है। इस्लामाबाद ने अमेरिकी मिशन के कार्यवाहक प्रमुख को विदेश मंत्रालय में बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उस समय कहा था कि अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी अमेरिका के उस लंबे समय से चले आ रहे रुख के विपरीत है, जिसमें भारत और पाकिस्तान को कश्मीर विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की बात कही जाती रही है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लेख किया था।

इस्लामाबाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मदद की पेशकश का भी हवाला दिया था। पाकिस्तान ने वॉशिंगटन से आग्रह किया था कि उसके सार्वजनिक बयानों में कश्मीर की विवादित स्थिति को ध्यान में रखा जाए।

क्या गोर के बयान से सच में अमेरिकी नीति बदल गई?

अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सर्जियो गोर की टिप्पणी के बाद अमेरिका ने कश्मीर पर अपनी औपचारिक नीति बदल दी। इसके उलट, 30 सितंबर को सामने आई पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों की जानकारी में अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर नीति में किसी बदलाव से इनकार किया है। वॉशिंगटन की कथित स्थिति अभी भी यही बताई जा रही है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद है और इसका समाधान दोनों देशों के बीच होना चाहिए।

हालांकि, गोर की टिप्पणी ने यह जरूर दिखाया कि कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अमेरिकी राजनयिक की सार्वजनिक भाषा किस तरह भारत-पाकिस्तान संबंधों में तत्काल प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है। ‘द डिप्लोमैट’ ने भी अगस्त में गोर की टिप्पणी को लेकर अमेरिकी रुख में संभावित बदलाव की चर्चाओं का उल्लेख किया था, जबकि भारत सरकार की प्रतिक्रिया को सावधान बताया था। वहीं अब पाकिस्तान को दिए गए अमेरिकी स्पष्टीकरण से यह संकेत मिलता है कि सार्वजनिक बयान और औपचारिक नीति के बीच अंतर बनाए रखा जा रहा है।

भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर पर पुराना विवाद

जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद का प्रमुख मुद्दा है। दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र को लेकर कई दशकों से राजनीतिक और सैन्य तनाव रहा है। अमेरिका सहित कई देश समय-समय पर दोनों पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने की अपील करते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में गोर का बयान पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण बन गया था, क्योंकि उनकी टिप्पणी को इस्लामाबाद ने अमेरिकी नीति के पुराने ढांचे से अलग समझा।

इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वॉशिंगटन ने पाकिस्तान को कथित तौर पर यह भरोसा दिया है कि सर्जियो गोर की टिप्पणी को अमेरिकी कश्मीर नीति में बदलाव नहीं माना जाना चाहिए। पाकिस्तान ने स्पष्टीकरण मांगकर जिस आशंका को सामने रखा था, उस पर अमेरिकी अधिकारियों ने कथित तौर पर नीति में बदलाव से इनकार किया है। ऐसे में अगस्त में शुरू हुआ विवाद अब उस स्थिति पर पहुंच गया है जहां गोर की व्यक्तिगत सार्वजनिक टिप्पणी और अमेरिका की घोषित कूटनीतिक नीति को अलग-अलग देखा जा रहा है।

स्रोत: ‘डॉन’ की 30 सितंबर 2026 की रिपोर्ट और अगस्त 2026 में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में प्रकाशित विवरण।