नई दिल्ली में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को INDIA गठबंधन की अहम बैठक हुई। बैठक का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों में किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां और आगे की संयुक्त रणनीति रही। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इनमें पुरानी मतदाता सूची को आधार बनाने, मतदाता का नाम हटाए जाने से पहले पर्याप्त सूचना और अपील का अवसर देने, योग्य मतदाताओं को प्रशासनिक कारणों से सूची से बाहर होने से बचाने, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान करने और EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान की मांग शामिल रही।
बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी तथा गठबंधन के अन्य दलों के नेता भी बैठक में शामिल हुए। समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिनिधित्व रहा, जबकि विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक कुछ सहयोगी दल बैठक में शामिल नहीं हुए। INDIA गठबंधन की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब विपक्षी दल SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इस मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
खरगे ने मतदाता सूची को लेकर रखी पहली मांग
बैठक में खरगे ने कहा कि भविष्य में होने वाले चुनावों के लिए SIR से पहले तैयार की गई मतदाता सूची को आधार बनाया जाना चाहिए। विपक्षी दलों की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अगर बड़ी संख्या में नाम हटते हैं, तो वास्तविक और पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। गठबंधन का कहना है कि चुनावी सूची में बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और प्रत्येक बड़े बदलाव का पर्याप्त रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR से संबंधित कुछ फैसलों और आदेशों पर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का जिक्र किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR से जुड़े मामलों में 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में सामने आए आपत्तियों वाले नोट्स प्रक्रिया के दौरान होने वाली आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा थे और उन्हें पूरे संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
नाम हटाने से पहले नोटिस और अपील का अधिकार
खरगे की दूसरी बड़ी मांग मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से संबंधित रही। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे इसकी जानकारी दी जानी चाहिए और उसके पास फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रभावी विकल्प होना चाहिए। विपक्ष का तर्क है कि केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड या दस्तावेजों से जुड़ी समस्या के कारण किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से बाहर नहीं होना चाहिए।
इसी से जुड़ी तीसरी मांग में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली गलतियों से पात्र मतदाताओं को बचाने की बात कही गई। यानी यदि किसी व्यक्ति ने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड, दस्तावेजों या सत्यापन प्रक्रिया में गलती की वजह से उसका नाम हटने की स्थिति बनती है, तो उसे सुधार का अवसर मिलना चाहिए। INDIA गठबंधन इन प्रक्रियाओं में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
पहली बार वोट डालने वालों के लिए आसान हो रजिस्ट्रेशन
खरगे ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण का मुद्दा भी उठाया। उनकी मांग है कि नए मतदाताओं के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सरल और आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। कांग्रेस ने पहले भी चुनावी प्रक्रिया में नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पारदर्शिता की मांग की है। INDIA गठबंधन का कहना है कि किसी युवा नागरिक को पहली बार मतदाता बनने के लिए अनावश्यक प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान के अधिकार के इस्तेमाल की बुनियादी शर्त है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल मतदान के दिन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मतदाता के पंजीकरण से लेकर सूची में नाम बनाए रखने और मतदान तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह होनी चाहिए।
EVM की जगह बैलेट पेपर की मांग
बैठक में सबसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में से एक EVM को लेकर रहा। खरगे ने कहा कि विपक्ष को भारत की चुनाव व्यवस्था में बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था वापस लाने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से विपक्षी दल EVM को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए मतदान प्रणाली में बदलाव पर विचार होना चाहिए।
खरगे ने अपने संबोधन में EVM को लेकर कांग्रेस के पुराने रुख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव व्यवस्था में जनता का विश्वास कायम करना जरूरी है और इसके लिए मतदान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक बैलेट पेपर पर लौटना इस दिशा में उठाया जाने वाला एक कदम हो सकता है। यह मांग INDIA गठबंधन की बैठक में चुनावी सुधार से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रही।
विपक्ष की ओर से EVM को लेकर सवाल नए नहीं हैं। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दल अलग-अलग मौकों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग, VVPAT और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग लगातार भारतीय चुनावों में EVM के इस्तेमाल की व्यवस्था का बचाव करता रहा है और चुनाव प्रक्रिया के लिए निर्धारित कानूनी एवं तकनीकी प्रक्रियाओं का हवाला देता है। इसलिए EVM का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच लगातार बहस का विषय बना हुआ है।
राहुल गांधी के पुराने आरोपों का भी जिक्र
खरगे ने अपने संबोधन में राहुल गांधी की ओर से पहले उठाए गए मतदाता सूची से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महादेवपुरा, आलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने चुनावी सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे। विपक्षी दलों ने अलग-अलग चुनावों के दौरान मतदाता सूची में नाम जुड़ने, हटने और संशोधन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
इन आरोपों के संदर्भ में चुनाव आयोग की ओर से अपनी प्रक्रियाओं और निर्णयों का बचाव किया गया है। इसलिए इस पूरे विवाद में विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं। SIR को लेकर मौजूदा राजनीतिक टकराव भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा है, जिसमें मतदाता सूची की शुद्धता, नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं।
बैठक का मकसद सिर्फ मांगें रखना नहीं
INDIA गठबंधन की बैठक का उद्देश्य केवल मांगों की सूची तैयार करना नहीं था। विपक्षी दल SIR के खिलाफ आगे की संयुक्त राजनीतिक कार्रवाई पर भी चर्चा कर रहे थे। गठबंधन ने चुनाव आयोग के सामने अपनी आपत्तियां रखने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन की रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बैठक के बाद विपक्षी दलों की ओर से आगे भी संयुक्त कार्यक्रमों की घोषणा की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच मतदाता सूची को लेकर टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ विपक्ष SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता, जवाबदेही और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहा है, वहीं आयोग का कहना है कि चुनावी सूची में संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत की जा रही है। आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर सामने आई रिपोर्टों पर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
चुनावी सुधार पर विपक्ष का जोर
खरगे की ओर से रखी गई मांगों को व्यापक रूप से देखें तो INDIA गठबंधन का जोर तीन प्रमुख क्षेत्रों पर दिखाई देता है—मतदाता सूची की विश्वसनीयता, मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा और मतदान प्रणाली को लेकर पारदर्शिता। गठबंधन चाहता है कि किसी योग्य नागरिक का नाम प्रशासनिक गलती से मतदाता सूची से बाहर न हो और यदि किसी नाम को हटाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को इसकी जानकारी और अपील का अवसर मिले।
इसी के साथ विपक्ष EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान की वापसी की मांग को भी चुनाव सुधार की अपनी व्यापक रणनीति का हिस्सा बना रहा है। खरगे ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता का विश्वास पारदर्शी तरीके से हासिल करना चाहिए। इस मुद्दे पर विपक्ष की मांग चुनावी प्रक्रिया में भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़ी है।
फिलहाल INDIA गठबंधन की बैठक के बाद SIR, मतदाता सूची और EVM का मुद्दा विपक्ष की संयुक्त राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। गठबंधन आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और मतदान प्रणाली से जुड़े सवालों को लेकर अपना अभियान आगे बढ़ाने की तैयारी में है। दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी सुधार और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।