फुटबॉल वर्ल्ड कप के प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में गुरुवार का दिन रोमांच, विवाद और जबरदस्त वापसी का गवाह बना। एक ओर बेल्जियम ने लगभग हारा हुआ मुकाबला अंतिम मिनटों में पलटते हुए सेनेगल को 3-2 से शिकस्त दी, वहीं दूसरी तरफ मेजबान अमेरिका ने एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद बोस्निया-हर्जेगोविना को 2-0 से हराकर अंतिम-16 में अपनी जगह मजबूत कर ली। अब अगले दौर में बेल्जियम और अमेरिका की टीमें आमने-सामने होंगी।
सबसे ज्यादा चर्चा सिएटल में खेले गए बेल्जियम और सेनेगल के मुकाबले की रही। निर्धारित समय खत्म होने से कुछ ही मिनट पहले तक सेनेगल 2-0 से आगे था और जीत लगभग तय मानी जा रही थी। लेकिन बेल्जियम ने अविश्वसनीय वापसी करते हुए पहले दो गोल दागे और फिर अतिरिक्त समय में मिले विवादित पेनल्टी के जरिए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
मैच की शुरुआत में दोनों टीमों ने तेज खेल दिखाया, लेकिन पहला बड़ा मौका सेनेगल के हिस्से आया। 25वें मिनट में हबीब डियारा ने शानदार मूव को गोल में बदलते हुए अपनी टीम को बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद अफ्रीकी टीम का आत्मविश्वास बढ़ गया और उसने बेल्जियम के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा।
दूसरे हाफ की शुरुआत के कुछ मिनट बाद ही सेनेगल ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। 51वें मिनट में मौसा नियाखाते की लंबी पास को इस्माइला सार ने बेहतरीन तरीके से कंट्रोल किया और गोलकीपर को छकाते हुए गेंद नेट में पहुंचा दी। इस गोल के साथ स्कोर 2-0 हो गया। मौजूदा विश्व कप में सार का यह चौथा गोल रहा, जिसने उन्हें टूर्नामेंट के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।
दो गोल की बढ़त मिलने के बाद ऐसा लग रहा था कि सेनेगल आसानी से क्वार्टर फाइनल में पहुंच जाएगा। बेल्जियम लगातार हमले कर रहा था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल रही थी। इसी बीच कोच ने बदलाव करते हुए अनुभवी स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू को मैदान पर उतारा और यही फैसला मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
86वें मिनट में लुकाकू ने बॉक्स के भीतर मिले मौके का शानदार फायदा उठाते हुए बेल्जियम के लिए पहला गोल कर दिया। इस गोल ने पूरी टीम में नई ऊर्जा भर दी। इसके बाद बेल्जियम ने लगातार आक्रामक खेल दिखाया और सेनेगल की रक्षापंक्ति पर दबाव बढ़ा दिया।
मैच समाप्त होने में कुछ ही पल बाकी थे कि 89वें मिनट में कप्तान यूरी टिलेमंस ने शानदार फिनिश के साथ स्कोर 2-2 कर दिया। यह गोल बेल्जियम के लिए जीवनदान साबित हुआ और मुकाबला अतिरिक्त समय तक पहुंच गया।
एक्स्ट्रा टाइम में दोनों टीमों ने कई मौके बनाए, लेकिन निर्णायक गोल नहीं हो पा रहा था। ऐसा लग रहा था कि अब मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से होगा। हालांकि अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में खेल ने नया मोड़ ले लिया।
125वें मिनट में बेल्जियम के कप्तान यूरी टिलेमंस गेंद लेकर पेनल्टी बॉक्स में पहुंचे। इसी दौरान सेनेगल के खिलाड़ी लैमिन कमारा के साथ उनका संपर्क हुआ और वे गिर पड़े। रेफरी ने पहले खेल जारी रखा, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की समीक्षा के बाद फैसला बदलते हुए बेल्जियम को पेनल्टी दे दी।
रेफरी के इस फैसले पर सेनेगल के खिलाड़ियों ने कड़ा विरोध जताया। डिफेंडर पाथे सिस नाराजगी जाहिर करते हुए पेनल्टी स्पॉट पर ही लेट गए, जबकि कई अन्य खिलाड़ियों ने भी रेफरी से लंबी बहस की। बावजूद इसके फैसला नहीं बदला और बेल्जियम को पेनल्टी लेने का मौका मिला।
दबाव की इस घड़ी में यूरी टिलेमंस ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने सटीक शॉट लगाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया और बेल्जियम को 3-2 की यादगार जीत दिला दी। एजेंसी रिपोर्ट के मुताबिक यह विश्व कप इतिहास में सबसे देर से किया गया निर्णायक गोल माना जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब बेल्जियम ने विश्व कप में ऐसी रोमांचक वापसी की हो। इससे पहले 2018 के विश्व कप के नॉकआउट चरण में भी टीम जापान के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बाद 3-2 से जीत दर्ज कर चुकी थी। इस बार भी टीम ने उसी जज्बे का प्रदर्शन करते हुए असंभव लग रही जीत को संभव बना दिया।
मैच खत्म होने के बाद सेनेगल के मुख्य कोच पापे थियाव ने पेनल्टी के फैसले पर असहमति जताई। उनका कहना था कि उनके अनुसार यह फाउल पेनल्टी देने लायक नहीं था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने फैसले का विरोध किया, लेकिन रेफरी का निर्णय अंतिम होता है और उसी फैसले ने उनकी टीम का विश्व कप सफर समाप्त कर दिया।
दूसरी ओर सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में मेजबान अमेरिका ने बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि मैच के दौरान अमेरिकी टीम को एक बड़ा झटका भी लगा, लेकिन इसके बावजूद उसने जीत हासिल करने में सफलता पाई।
अमेरिका ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन लगातार विपक्षी डिफेंस पर दबाव बना रहे थे। शुरुआती दौर में उन्होंने गेंद को नेट में भी पहुंचाया, लेकिन ऑफसाइड होने के कारण वह गोल मान्य नहीं हुआ।
पहले हाफ के इंजुरी टाइम में अमेरिका को आखिरकार सफलता मिली। मलिक टिलमैन ने बेहतरीन थ्रू बॉल खेली, जिस पर फोलारिन बालोगुन ने शानदार नियंत्रण दिखाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ अमेरिका ने 1-0 की बढ़त बना ली और इसी स्कोर के साथ पहला हाफ समाप्त हुआ।
दूसरे हाफ में भी बालोगुन काफी सक्रिय नजर आए। उन्होंने एक और बेहतरीन मौका बनाया, लेकिन उनका शॉट क्रॉसबार से टकराकर बाहर निकल गया। इसके बाद मैच का सबसे बड़ा मोड़ 64वें मिनट में आया।
VAR समीक्षा के बाद रेफरी ने बालोगुन को बोस्निया के खिलाड़ी तारिक मुहरेमोविच पर खतरनाक टैकल का दोषी मानते हुए सीधा रेड कार्ड दिखा दिया। इसके बाद अमेरिका को लगभग आधा घंटा 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा।
संख्यात्मक रूप से कमजोर होने के बावजूद अमेरिकी खिलाड़ियों ने शानदार अनुशासन और संयम का परिचय दिया। टीम ने रक्षात्मक मजबूती बनाए रखी और मौके मिलने पर जवाबी हमले भी जारी रखे।
82वें मिनट में अमेरिका को फ्री-किक मिली। मलिक टिलमैन ने इस अवसर का शानदार फायदा उठाया और बेहतरीन शॉट के जरिए गेंद सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दी। इस गोल ने अमेरिका की बढ़त 2-0 कर दी और बोस्निया की वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं।
मैच के दौरान अमेरिका के स्टार खिलाड़ी क्रिश्चियन पुलिसिक ने भी गेंद को नेट में पहुंचाया था, लेकिन वीडियो समीक्षा में उन्हें ऑफसाइड पाया गया और उनका गोल रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद अमेरिकी टीम ने आत्मविश्वास बनाए रखा और दो गोल की जीत दर्ज करने में सफल रही।
इन दोनों मुकाबलों के बाद अब टूर्नामेंट का रोमांच और बढ़ गया है। एक तरफ बेल्जियम ने आखिरी मिनटों तक संघर्ष कर यह साबित कर दिया कि मैच समाप्त होने तक कुछ भी संभव है, वहीं अमेरिका ने यह दिखाया कि एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद मजबूत टीमवर्क और अनुशासन के दम पर बड़े मुकाबले जीते जा सकते हैं। अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें बेल्जियम और अमेरिका के बीच होने वाले अगले मुकाबले पर होंगी, जहां दोनों टीमें क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।