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Heatwave Alert: घर के अंदर रहकर भी बढ़ सकता है गर्मी का असर, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

भीषण गर्मी और हीटवेव के दौरान ज्यादातर लोग खुद को सुरक्षित रखने के लिए घर के भीतर रहना बेहतर विकल्प मानते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल घर में रहना ही पर्याप्त नहीं है। यदि घर में तापमान अधिक है, हवा का आवागमन ठीक नहीं है और उमस बनी हुई है, तो इसका असर शरीर पर उतना ही गंभीर हो सकता है जितना बाहर की गर्मी का।

विशेषज्ञ डॉ. मयंक लोढ़ा सेठ के अनुसार, हीटवेव के समय शरीर लगातार अपने तापमान को नियंत्रित रखने की कोशिश करता है। यह प्रक्रिया तब भी जारी रहती है जब व्यक्ति घर के अंदर हो। ऐसे में लंबे समय तक गर्म और बंद वातावरण में रहने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

घर के भीतर क्यों बढ़ जाता है जोखिम?

जब कमरे में वेंटिलेशन की कमी होती है और गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती, तो अंदर का तापमान लगातार बढ़ सकता है। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ने से थकान, सुस्ती और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कई मामलों में लोगों की नींद भी प्रभावित होती है, जिससे शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार गर्म माहौल में रहने से हृदय को भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। शरीर को ठंडा रखने के प्रयास में दिल की धड़कन सामान्य से 10 से 15 बीट प्रति मिनट तक बढ़ सकती है।

इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

हीटवेव का प्रभाव केवल तेज धूप तक सीमित नहीं रहता। शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, जिससे कई तरह की परेशानियां पैदा हो सकती हैं। लगातार सिरदर्द, अत्यधिक थकान, मांसपेशियों में झुनझुनी, बेचैनी या धड़कन तेज महसूस होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सबसे बड़ा खतरा क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि हीटवेव से जुड़ी परेशानियों में सबसे बड़ा जोखिम गर्मी नहीं, बल्कि उसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना है। समय रहते सावधानी और सही देखभाल न करने पर ये समस्याएं गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती हैं। इसलिए गर्मी के दिनों में घर के अंदर भी पर्याप्त वेंटिलेशन, पानी का सेवन और आराम का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

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