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मोहाली में TDI सिटी के दफ्तर पहुंची ED की टीम, जमीन मुआवजे से जुड़े मामले में रिकॉर्ड खंगाले

मोहाली के सेक्टर-119 स्थित TDI सिटी के कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम के पहुंचने से इलाके में हलचल मच गई। अधिकारियों ने कार्यालय परिसर में पहुंचकर वहां मौजूद रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य सामग्री की जांच की। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मौजूद कई लोगों के मोबाइल फोन भी अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिए थे। हालांकि, इस पूरी कार्रवाई को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, ED की टीम कई वाहनों के जरिए TDI सिटी के कार्यालय पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब तीन गाड़ियों में अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। टीम के अंदर दाखिल होने के बाद कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। शुरुआती कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद लोगों को कार्यालय से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने अलग-अलग हिस्सों में रखे रिकॉर्ड और फाइलों को देखना शुरू किया।

कार्यालय में जांच के दौरान अधिकारियों ने कई तरह के दस्तावेजों और रिकॉर्ड को खंगाला। कुछ लोगों से पूछताछ किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। मोबाइल फोन अपने पास लिए जाने के बाद कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच भी स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, ED की कार्रवाई का आधिकारिक कारण एजेंसी की तरफ से सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया गया है। इसलिए फिलहाल सामने आई जानकारी को जांच से जुड़े सूत्रों और मौके पर मौजूद लोगों के बयानों के आधार पर देखा जा रहा है।

इस कार्रवाई को लेकर सामने आ रही सबसे अहम जानकारी मोहाली में PR-6 सड़क के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे से जुड़ी बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जमीन के मुआवजे में कथित तौर पर करीब छह करोड़ रुपये की अनियमितता की जांच की जा रही है। बताया जाता है कि यह जमीन मास्टर प्लान के दायरे में आती थी और बाद में इसके लिए CLU यानी Change of Land Use की मंजूरी से संबंधित प्रक्रिया हुई थी।

जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि CLU की मंजूरी मिलने के बाद जमीन के कुछ हिस्सों को कंपनी से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत कराया गया। आरोप यह है कि ऐसा जमीन के लिए मिलने वाले मुआवजे की राशि को अधिक करने के उद्देश्य से किया गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। ED की ओर से भी इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू जमीन की रजिस्ट्रियों से संबंधित बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बाद के चरण में कंपनी की ओर से GMADA के समक्ष इन रजिस्ट्रियों को रद्द करने के लिए आवेदन किए जाने की बात सामने आई। ऐसे में जमीन के स्वामित्व, रजिस्ट्रियों, CLU मंजूरी और मुआवजे से जुड़े रिकॉर्ड जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यही वजह मानी जा रही है कि ED की टीम ने कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड को बारीकी से देखा।

दरअसल, TDI से जुड़े मामले की जांच केवल मोहाली तक सीमित नहीं बताई जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय पहले से TDI Infrastructure Limited से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहा है। इसी जांच के दौरान कंपनी की परियोजनाओं, जमीन से जुड़े लेनदेन और खरीदारों से प्राप्त धन के इस्तेमाल से संबंधित जानकारियां एजेंसी के सामने आने की बात कही गई है। मोहाली स्थित कार्यालय में हुई कार्रवाई को भी इसी व्यापक जांच के संदर्भ में देखा जा रहा है।

ED से जुड़े सूत्रों के अनुसार, TDI Infrastructure Limited ने वर्ष 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में बड़ी संख्या में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं। एजेंसी के अनुसार, इस अवधि में कंपनी ने कुल 23 परियोजनाएं शुरू कीं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने घर, फ्लैट, दुकान या अन्य व्यावसायिक संपत्ति लेने के उद्देश्य से कंपनी में पैसा लगाया था।

जांच एजेंसी के अनुसार, इन परियोजनाओं के लिए 14 हजार से अधिक खरीदारों से 4,619 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम एकत्र की गई थी। आरोपों के मुताबिक, खरीदारों से राशि लेने के बावजूद कई परियोजनाएं तय समय में पूरी नहीं हो सकीं। जांच में कुछ प्रोजेक्ट्स के लंबे समय तक लंबित रहने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ परियोजनाओं में देरी 16 से 18 साल तक पहुंच गई।

ED की जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना भी है कि खरीदारों से हासिल की गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया। एजेंसी का आरोप है कि परियोजनाओं को पूरा करने में पूरी राशि लगाने के बजाय कंपनी के प्रमोटरों ने धन को दूसरी संबंधित संस्थाओं की तरफ स्थानांतरित किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इनमें कंपनी की सहायक कंपनियां और जमीन के मालिकों से जुड़ी संस्थाएं शामिल थीं।

बताया जा रहा है कि रकम को कई मामलों में जमीन से संबंधित संस्थाओं के पक्ष में अग्रिम भुगतान के तौर पर दिखाया गया। ED अब यह जांच कर रही है कि इन वित्तीय लेनदेन का वास्तविक स्वरूप क्या था और क्या इनका संबंध उन परियोजनाओं से था जिनके लिए खरीदारों से पैसा लिया गया था। इसी क्रम में बैंकिंग रिकॉर्ड, जमीन से संबंधित दस्तावेज, कंपनियों के बीच हुए लेनदेन और अन्य वित्तीय कागजात जांच के दायरे में होने की बात कही जा रही है।

मोहाली में हुई कार्रवाई को इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि PR-6 सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण और उसके मुआवजे से संबंधित दस्तावेज भी कंपनी के रिकॉर्ड का हिस्सा हो सकते हैं। जांच एजेंसी यह देख सकती है कि संबंधित जमीन किसके नाम थी, जमीन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना था, CLU की प्रक्रिया कब पूरी हुई और उसके बाद रजिस्ट्रियों में किस तरह के बदलाव किए गए।

जमीन के मुआवजे से जुड़ी कथित अनियमितता में करीब छह करोड़ रुपये की रकम का उल्लेख सामने आया है। हालांकि, यह राशि किस आधार पर निर्धारित की गई और इसमें कथित गड़बड़ी का स्वरूप क्या था, इस बारे में एजेंसी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले में सामने आ रहे आरोपों को जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

कार्यालय में कार्रवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा मोबाइल फोन अपने कब्जे में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। आमतौर पर किसी जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों से संबंधित जानकारी भी अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इस मामले में ED ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि कितने मोबाइल फोन लिए गए, किन लोगों के फोन लिए गए या उनसे किस तरह की जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, जांच शुरू होने के बाद कार्यालय के भीतर गतिविधियां सीमित कर दी गई थीं। अधिकारी अलग-अलग रिकॉर्ड की पड़ताल करते रहे और कुछ लोगों से सवाल-जवाब भी किए गए। कार्रवाई कितने समय तक चली और टीम अपने साथ कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य सामग्री लेकर गई, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं हुई है।

TDI से जुड़े इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि मोहाली की जमीन और मुआवजे से संबंधित रिकॉर्ड का कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले से क्या संबंध है। जांच एजेंसी कंपनी की परियोजनाओं और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पहले से पड़ताल कर रही है। ऐसे में सेक्टर-119 स्थित कार्यालय से मिले दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जांच की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि ED की कार्रवाई जारी जांच का हिस्सा बताई जा रही है, जबकि एजेंसी की ओर से छापेमारी या जांच के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जमीन के मुआवजे, CLU मंजूरी, रजिस्ट्रियों और कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी। आने वाले समय में ED की ओर से यदि इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी की जाती है, तो उससे मामले की वास्तविक स्थिति और जांच के दायरे को लेकर अधिक स्पष्टता मिल सकती है।