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बच्चों की आंखें तो नहीं हो रहीं कमजोर? इन 5 संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

बच्चों में आंखों से जुड़ी दिक्कतें अक्सर शुरुआत में समझ नहीं आतीं, लेकिन समय रहते पहचान न होने पर इसका असर पढ़ाई, खेलकूद और रोजमर्रा की एक्टिविटी पर पड़ सकता है। कई बार बच्चे खुद अपनी परेशानी ठीक से बता भी नहीं पाते। ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे कुछ शुरुआती संकेतों पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर आंखों की जांच करवाएं।

किन कारणों से बच्चों को लग सकता है चश्मा

  • आंखों की रोशनी कमजोर होना
  • लेजी आई जैसी समस्या होना
  • आंखों का तिरछापन या क्रॉस आई
  • एक आंख से कम दिखाई देना
  • विजन को बेहतर और सुरक्षित रखने की जरूरत

ये 5 संकेत बताते हैं कि बच्चे की नजर कमजोर हो सकती है

1. चीजों को देखने के लिए आंखें सिकोड़ना
अगर बच्चा टीवी, बोर्ड या दूर की चीजें देखते समय आंखें छोटी करके देखने की कोशिश करता है, तो यह विजन प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है।

2. मोबाइल या टीवी बहुत पास से देखना
बच्चा अगर स्क्रीन के बेहद करीब बैठकर देखता है या किताब को चेहरे के पास लाकर पढ़ता है, तो आंखों की जांच जरूरी हो सकती है।

3. बार-बार आंख मलना
लगातार आंखें रगड़ना आंखों में थकान, एलर्जी या स्ट्रेन का संकेत हो सकता है। इसे सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

4. सिरदर्द या आंखों में दर्द होना
पढ़ाई के बाद बच्चे को सिर दर्द या आंखों में भारीपन महसूस होता है तो इसकी वजह धुंधला दिखाई देना भी हो सकता है।

5. पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी
क्लासरूम में बार-बार फोकस बदलने में दिक्कत होने पर बच्चा पढ़ाई में पीछे रहने लगता है या उसका ध्यान भटकने लगता है।

क्या करें माता-पिता?

अगर स्कूल के आई टेस्ट या सामान्य जांच में समस्या साफ न दिखे, लेकिन बच्चे में ये लक्षण नजर आएं, तो नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की पूरी जांच जरूर करवाएं। समय पर इलाज और सही नंबर का चश्मा बच्चे की पढ़ाई और आंखों दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

(Photo : AI Generated)