ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज हो गई हैं। देश की सरकार इस मौके को एक बड़े राष्ट्रीय आयोजन के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि अंतिम यात्रा 4 जुलाई को तेहरान से शुरू होगी और 9 जुलाई को मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान उनके जनाजे को कई शहरों से गुजारा जाएगा, जहां बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
लेकिन इस पूरे आयोजन में एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्या मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता की अंतिम यात्रा में सार्वजनिक रूप से दिखाई देंगे? दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी हुई है कि मोजतबा अपने पिता को आखिरी विदाई देने के लिए जनता के बीच आते हैं या फिर पहले की तरह पर्दे के पीछे रहकर ही जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।
मोजतबा खामेनेई पिछले काफी समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए हैं। खासतौर पर 28 फरवरी के बाद से उनकी कोई बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई है। इसी वजह से उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि ईरानी अधिकारियों का कहना है कि मोजतबा पूरी तरह सक्रिय हैं और देश के कामकाज में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
मीडिया में उनके नाम से लगातार बयान जारी होते रहे हैं, लेकिन वह खुद कैमरों के सामने नहीं आए हैं। यही वजह है कि उनके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने का मुद्दा केवल पारिवारिक या धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे ईरान की राजनीति और सत्ता की स्थिरता से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए हमले के दौरान मोजतबा भी प्रभावित हुए थे। उनके घायल होने को लेकर कई दावे सामने आए थे। कुछ रिपोर्टों में उनके चेहरे पर गंभीर चोट और पैर में परेशानी की बात कही गई थी। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को लेकर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की और लगातार यही कहा कि मोजतबा अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सत्ता व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला और उनके बेटे मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर चुना गया। इस बदलाव के बाद से ही उनकी सार्वजनिक भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी दिलचस्पी बनी हुई है। अब अंतिम संस्कार ऐसा मौका माना जा रहा है, जहां उनकी मौजूदगी कई सवालों के जवाब दे सकती है।
ईरान के इतिहास में बड़े नेताओं के अंतिम संस्कार केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं रहे हैं, बल्कि वे सत्ता और एकजुटता दिखाने के मंच भी बने हैं। जब ईरान के संस्थापक नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ था, तब अली खामेनेई सहित कई बड़े नेता सार्वजनिक रूप से मौजूद रहे थे। इसी परंपरा को देखते हुए कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा भी अपने पिता की अंतिम विदाई में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि ईरानी प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है कि मोजतबा खामेनेई अंतिम यात्रा में किस तरह हिस्सा लेंगे। उनकी सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल हैं। मौजूदा हालात में ईरान अपने शीर्ष नेता को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा।
मोजतबा की सार्वजनिक मौजूदगी जहां सुरक्षा के लिहाज से चुनौती हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ यह उनके लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो सकता है। अगर वह लाखों लोगों की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में सामने आते हैं तो इससे उनकी सेहत को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग सकता है। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि ईरान का नया नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय और नियंत्रण में है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा के सामने आने से ईरान अपने विरोधियों को भी संदेश देना चाहता होगा। खासकर ऐसे समय में जब देश अंतरराष्ट्रीय तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों से गुजर रहा है, शीर्ष नेतृत्व की सार्वजनिक मौजूदगी मनोवैज्ञानिक तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
हाल के दिनों में भले ही मोजतबा कैमरों से दूर रहे हों, लेकिन ईरानी अधिकारियों के मुताबिक वह पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं। उनके लिखित निर्देश और बयान सामने आते रहे हैं। न्यायपालिका से जुड़े हालिया बयान में उन्होंने जून 2025 के संघर्ष और फरवरी में शुरू हुए युद्ध के दौरान हुए अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।
इसी वजह से कई पर्यवेक्षक मानते हैं कि मोजतबा पूरी तरह राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर नहीं हैं, बल्कि अपनी भूमिका एक अलग तरीके से निभा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि वह अमेरिका के साथ युद्धविराम से जुड़ी बातचीत में पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह पहली बार बड़े सार्वजनिक मंच पर नए सुप्रीम लीडर के रूप में दिखाई देंगे या फिर सुरक्षा कारणों से दूरी बनाए रखेंगे। अंतिम संस्कार के दौरान उनका फैसला न केवल ईरान के अंदर बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत माना जाएगा।
अगर मोजतबा खामेनेई जनता के सामने आते हैं तो यह उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने वाला कदम हो सकता है। इससे यह दिखाने की कोशिश होगी कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद ईरान की सत्ता व्यवस्था स्थिर है। वहीं अगर वह कार्यक्रम से दूर रहते हैं तो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।
फिलहाल ईरान सरकार का पूरा ध्यान अली खामेनेई को दी जाने वाली अंतिम विदाई की तैयारियों पर है। लाखों लोगों की भागीदारी वाले इस आयोजन को देश की ताकत और एकता के प्रदर्शन के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र अब भी मोजतबा खामेनेई ही बने हुए हैं।
उनकी एक झलक यह तय कर सकती है कि आने वाले समय में ईरान के नए नेतृत्व को दुनिया किस नजर से देखेगी। अंतिम यात्रा सिर्फ एक पूर्व नेता को विदाई देने का कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि यह ईरान की नई राजनीतिक दिशा का भी संकेत दे सकती है।